Tuesday, September 23, 2014

पैन कार्ड पर लिखे कोड में होती आपकी जानकारी

नई दिल्ली. पैन कार्ड एक ऐसा डॉक्युमेंट है, जिसकी जरूरत दैनिक उपयोग के कई आवश्यक कार्यों में पड़ती है। इनकम टैक्स रिटर्न भरने में भी पैन नंबर जरूरी होता है। तत्काल टिकट में भी आईडी प्रूफ की आवश्यकता होती है, जिसमें अधिकांश लोग पैन नंबर देना ही जरूरी समझते हैं।
क्या कभी सोचा है कि आखिर पर्मानेंट एड्रेस नंबर, यानी पैन नंबर में ऐसा क्या छिपा है, जो आपके और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लिए जरूरी है। चलिए हम आपको पैन कार्ड और पैन नंबर से जुड़ी पूरी जानकारी देंगे। हम यह भी बताएंगे कि पैन कार्ड पर मौजूद नंबर का क्या मतलब होता है।
आइए जानते हैं पैन कार्ड में दिए गए हर नंबर का क्या होता है मतलब-
पैन कार्ड नंबर एक 10 डिजिट का खास नंबर होता है, जो लेमिनेटेड कार्ड के रूप में आता है। इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट वाले उन लोगों को इश्यू करते हैं, जो पैन कार्ड के लिए अर्जी देते हैं। पैन कार्ड बन जाने के बाद उस व्यक्ति के सारे फाइनेंशियल ट्रान्जैक्शन डिपार्टमेंट के पैन कार्ड से लिंक हो जाते हैं। इनमें टैक्स पेमेंट, क्रेडिट कार्ड जैसे कई फाइनेंशियल लेन-देन डिपार्टमेंट की निगरानी में रहते हैं।
इस नंबर के पहले तीन डिजिट अंग्रेजी के लेटर्स होते हैं। यह AAA से लेकर ZZZ तक कोई भी लेटर हो सकता है। ताजा चल रही सीरीज के हिसाब से यह तय किया जाता है। यह नंबर डिपार्टमेंट अपने हिसाब से तय करता है।
पैन कार्ड नंबर का चौथा डिजिट भी अंग्रेजी का ही एक लेटर होता है। यह पैन कार्डधारी का स्टेटस बताता है। इसमें-
P- एकल व्यक्ति
F- फर्म
C- कंपनी
A- AOP ( असोसिएशन ऑफ पर्सन)
T- ट्रस्ट
H- HUF (हिन्दू अनडिवाइडिड फैमिली)
B-BOI (बॉडी ऑफ इंडिविजुअल)
L- लोकल
J- आर्टिफिशियल जुडिशियल पर्सन
G- गवर्नमेंट के लिए होता है
पैन कार्ड नंबर का पांचवा डिजिट भी ऐसा ही एक अंग्रेजी का लेटर होता है। यह लेटर पैन कार्डधारक के सरनेम का पहला अक्षर होता है। यह सिर्फ धारक पर निर्भर करता है। गौरतलब है कि इसमें सिर्फ धारक का लास्ट नेम ही देखा जाता है।
इसके बाद पैन कार्ड में 4 नंबर होते हैं। यह नंबर 0001 से लेकर 9999 तक, कोई भी हो सकते हैं। आपके पैन कार्ड के ये नंबर उस सीरीज को दर्शाते हैं, जो मौजूदा समय में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में चल रही होती है। इसका आखिरी डिजिट एक अल्फाबेट चेक डिजिट होता है, जो कोई भी लेटर हो सकता है।
कहां-कहां है पैन कार्ड जरूरी
पैन कार्ड की मदद से आपको विभिन्न वित्तीय लेन-देन में आसानी होती है। इसकी मदद से आप बैंक खाता और डीमैट खाता खोल सकते हैं। इसके अलावा प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त के लिए भी यह जरूरी होता है। दरअसल, पैन कार्ड टैक्सेबल सैलरी या प्रोफेशनल फी हासिल करने के लिए भी आवश्यक है। यह इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए भी जरूरी है।
चूंकि पैन कार्ड पर नाम और फोटोग्राफ होता है, ऐसे में यह आइडेंटिटी प्रूफ के तौर पर काम करता है। भले ही आपका पता बदलता रहे, लेकिन पैन नंबर नहीं बदलता।
ऊंची दर पर टैक्स डिडक्शन से बचने के लिए पैन कार्ड जरूरी है। दरअसल, जब आप 50 हजार रुपए से अधिक राशि की एफडी शुरू करते हैं, तो पैन कार्ड की फोटोकॉपी देनी होती है। पैन के अभाव में ऊंची दर पर आपका टीडीएस काट लिया जाएगा।
इन परिस्थितियों में भी है पैन कार्ड आवश्यक
=> दो पहिया के अलावा किसी अन्य वाहन की खरीद-बिक्री
=> किसी होटल या रेस्तरां में एक बार में 25 हजार रुपए से अधिक की अदायगी
=> शेयरों की खरीदारी के लिए किसी कंपनी को 50 हजार रुपए या इससे अधिक की अदायगी
=> बुलियन या ज्वलैरी की खरीदारी के लिए पांच लाख रुपए से अधिक की अदायगी     
=> पांच लाख रुपए या इससे अधिक कीमत की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री 
=> बैंक में 50 हजार रुपए से अधिक जमा
=> विदेश यात्रा के संबंध में 25 हजार रुपए से अधिक की अदायगी
=> बॉन्ड खरीदने के लिए आरबीआई को 50 हजार रुपए या इससे अधिक की अदायगी
=> बॉन्ड या डिबेंचर खरीदने के लिए किसी कंपनी या संस्था को 50 हजार रुपए या इससे अधिक की अदायगी
=> म्यूचुअल फंड की खरीदारी

क्या करें जब पैन कार्ड गुम हो जाए
 
पैन कार्ड आज किसी भी वित्तीय लेन-देन का अहम हिस्सा है। इसके अलावा यह किसी व्यक्ति के पहचान पत्र के तौर पर भी काम करता है। ऐसे में यदि किसी का पैन कार्ड गायब हो जाए, तो उसका परेशान होना लाजमी है। लेकिन उसे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि पैन कार्ड फिर से बनवाना काफी आसान है।
 
स्टेप वन
 
इनकम टैक्स पैन सर्विसेज यूनिट की वेबसाइट पर जाएं। यहां आपको कई विकल्प दिखाई देंगे। इनमें से आप ‘रीप्रिंट ऑफ पैन कॉर्ड’ का विकल्प अपनाना चाहिए। यह उन लोगों के लिए होता है जिन्हें पहले से परमानेंट एकाउंट नंबर (पैन) एलॉट किया जा चुका है, लेकिन उन्हें फिर से पैन कार्ड की जरूरत होती है। इस विकल्प को अपनाने के बाद उस आवेदक को एक नया पैन कार्ड जारी किया जाता है, जिस पर वही नंबर होता है।
स्टेप टू
 
आपको इस फॉर्म के सभी कॉलम भरने होंगे, लेकिन बायें मार्जिन के बॉक्स में किसी पर भी सही का निशान नहीं लगाना है। उसके बाद आपको 105 रुपए का पेमेंट करना होगा। आप चाहें तो क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, डिमांड ड्राफ्ट या चेक के जरिए यह भुगतान कर सकते हैं। यह सारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद आप जब यह फॉर्म जमा करेंगे, तो आपके सामने एकनॉलेजमेंट रिसीट आएगा।
 
स्टेप थ्री
 
आप इस रिसीट का प्रिंट निकालें। इस पर 2.5 सेमी गुणे 3.5 सेमी आकार का रंगीन फोटोग्राफ चिपकाएं। अपने हस्ताक्षर करें। अगर आप डिमांड ड्राफ्ट या चेक के जरिए भुगतान किया है, तो उसकी प्रति साथ में लगाएं। फिर इसे आईडी प्रूफ, एड्रेस प्रूफ और डेट ऑफ बर्थ के प्रूफ के साथ एनएसडीएल के पुणे स्थित कार्यालय में भेज देना चाहिए।

Sunday, September 21, 2014

सूचना का अधिकार चाहिए, तो कारण बताना होगा

सूचना के अधिकार के तहत काम में पारदर्शिता लाने के अधिनियम के मद्देनजर मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि आरटीआई फाइल करते समय सूचना मांगने पर इसका कारण भी बताना होगा। साथ ही, अदालत ने प्रमुख मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के खिलाफ शिकायत पर रजिस्ट्रार ऑफिस को फाइल नोटिंग का खुलासा करने से छूट दे दी है। हाई कोर्ट के इस फैसले से आरटीआई कानून के तहत सूचना हासिल करने के अधिकार पर दूरगामी प्रभाव पड़ने के आसार हैं। इसकी आलोचना कानून के विशेषज्ञों ने भी की है।

'मकसद कानून संगत होना चाहिए'
जस्टिस एन. पॉल वसंतकुमार और के. रविचंद्रबाबू की खंडपीठ ने कहा कि आवेदक को सूचना मांगने का उद्देश्य जरूर बताना चाहिए। उसे यह भी पुष्टि करनी चाहिए कि उसका उद्देश्य कानूनसंगत है। पीठ ने कहा कि अगर सूचना किसी ऐसे व्यक्ति को दी जाती है, जिसके पास इसे मांगने के पीछे कोई वजह नहीं है, तो इस तरह सूचनाओं के पर्चे बांटने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकती। विधायिका ने जब आरटीआई कानून पारित किया था तो उसमें विशेष तौर पर धारा 6(2) शामिल की गई थी। इस धारा के अनुसार सूचना के लिए आवेदन देने पर व्यक्ति को इसके लिए कोई भी वजह देने की जरूरत नहीं होगी। मद्रास हाई कोर्ट के आदेश में सूचना के अधिकार कानून की धारा 6(2) का जिक्र नहीं है।




'विधायिका के खिलाफ नहीं'
हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत का यह फैसला विधायिका के खिलाफ नहीं है, लेकिन कानून का मकसद पूरा होना चाहिए। अधिनियम का उद्देश्य सार्वजनिक प्राधिकरण की पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना है।

आदेश RTI की मूल भावना के खिलाफ : प्रशांत भूषण
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आदेश को 'अवैध' बताते हुए कहा है कि यह कानून की 'मूल भावना' के खिलाफ है। प्रशांत भूषण ने कहा कि यह हाई कोर्ट का सेल्फ सर्विंग ऑर्डर है। यह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों के अनुरूप नहीं है। इससे अदालत की प्रशासनिक पारदर्शिता में रुकावट पड़ती है। आरटीआई के कार्यकर्ता सी. जे. करीरा ने कहा कि यह फैसला आरटीआई कानून के लिए गंभीर झटका है। यह स्पष्ट रूप से कुछ किए बिना धारा 6(2) को निष्फल करने की कोशिश है। प्रसिद्ध आरटीआई विशेषज्ञ शेखर सिंह ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सूचना के अधिकार को मूल अधिकार के तौर पर परिभाषित किया है। इसका इस्तेमाल करने की किसी को कोई वजह बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन इस आदेश से हाई कोर्ट ने शीर्ष अदालत के पहले के आदेश को उलट कर रख दिया है।

जिस समय उन्होंने कहा कि सूचना मांगने वाले व्यक्ति को इसकी वजहें देनी होंगी, वहीं आवेदक के मौलिक अधिकार का हनन हो गया। कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव के कार्यक्रम संयोजक वेंकटेश नायक के अनुसार 'सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार है। यह भारत में जन्मे हर नागरिक को प्राप्त है। आपको अपने मौलिक अधिकारों के इस्तेमाल के लिए वजह बताने की जरूरत नहीं है। सूचना के अधिकार को अनुच्छेद 19 (1) (ए)में प्रदत्त भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 में वर्णित जीवन के अधिकार के तहत सुप्रीम कोर्ट से मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जब कोई कहे कि एक नागरिक को यह साबित करने की जरूरत है कि वह कोई सूचना विशेष किसलिए चाहता है, जबकि उस सूचना को सार्वजनिक प्राधिकरण अपनी मर्जी से सार्वजनिक कर सकता है तो यह 'मौजूदा न्यायशास्त्र का मजाक' और 'एक बडा आश्चर्य' है। 


 courtesy-  navbharattimes.indiatimes.com 

Saturday, September 20, 2014

अब आपके साथ नहीं होगी धोखाधड़ी!

अब आपके बैंक में जमा पैसे से हुई छेड़छाड़ या बैंकिंग या वित्तीय धोखाधड़ी के मामले मेें न्याय मिलने में हो सकता है कि देरी न हो। क्योंकि खबर है कि सीवीसी ने एक सलाहकार बोर्ड का गठन किया है। जो बैंकों या वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच करेगा। साथ ही सीबीआई जैसी संस्थओं की मदद भी करेगा। जिससे ऐसे मामलों में जल्द ही नतीजे आ जाएं और आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जाए।

बताया जा रहा है कि यह सलाहकार बोर्ड सीबीआई के एक सांगठनिक ढांचे का हिस्स होगा। रिजर्व बैंक इसके लिए आश्वश्यक धन के अलावा जरूरी जांच व सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष पूर्व सतर्कता आयुक्त रंजना कुमार होंगे। इसका कार्यालय मुंबई में स्थित होगा। बोर्ड के सदस्यों में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पूर्व सचिव ब्रह्म दत्त, राष्ट्रीय मानावाधिकार आयोग के पूर्व मनानिदेशक (जांच) सुनील कृष्ण और देना बैंक के पूर्व चेयरमैन डीएल रावल शामिल होंगे।

courtesy- hindi.goodreturns.in

सतर्क हो जाएं आपका पीएफ खाता लूट न ले जाए कोई

क्या आप पीएफ खातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। तो खबरदार। सावधान। आपने पिछली कम्पनी की नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ खाते से पैसा नहीं निकाला है तो अपना पीएफ खाते की जानकारी और पैसा जल्द से जल्द निकाल लें। नहीं ऐसी सूचनाएं हैं कि भारतीय पीएप खातों पर शातिरों की नजर है। जो खातों से बड़ी रकम उड़ाने की फिराक में हैं।


बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट की माने तो धोखेबाजों ने फर्जी निकासी दावों के जरिये 2 करोड़ से अधिक पीएफ खातों की रकम पर हाथ साफ कर लिया है। इनमें से ज्यादातर खातों में काफी कम बैलेंस है। मुख्य तौर पर ऐसे खातों को निशाना बनाया गया जो बेकार या निष्क्रिय पड़े हैं।

जानकारों का कहना है कि यदि अपने पीएफ खाते में कुछ भी गड़बड़ी के संकेत देखे तो इसकी जानकारी इम्पलॉयी प्रोवीडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) में जरूर दें। जिससे आपको अपने खाते की सुरक्षा के बारे में पता लग पाएगा। सूचना का अधिकार का करें उपयोग यदि ईपीएफओ आपको अपने रिकॉर्ड जांचने की अनुमति नहीं देता है तो आप सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत जानकारी हासिल कर सकते हैं। क्योंकि यह जानकारी प्राप्त करना सूचना के अधिकार के तहत आती है। यहां भी मदद नहीं मिलती है तो आप श्रम विभाग या श्रम मंत्रालय से मदद ले सकते हैं।

courtesy- hindi.goodreturns.in

बच्चे के नाम PPF अकाउंट तो टैक्स में भी छूट, कैसे हो सकता है जानिए

क्या आपको पता है कि आप पीपीएफ आकाउंट अपने बच्चे के नाम से खोल सकते हैं। जिससे आपकी सेविंग की संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही साथ ही आपको टैक्स में भी काफी छूट मिल सकती है। यह सेविंग लॉंग टर्म के लिए हो सकती है। यह अकाउंट खुलवाने के बाद इसको बच्चों के अभिभावक ऑपरेट करते हैं। जिससे कोई परेशानी की भी बात नहीं होती।

कौन और कैसे खोलें अकाउंट अभिभावक के रूप में नाबालिग बच्चे नाम से पीपीएफ अकाउंट खोल सकते हैं। नाबालिग बच्चे के नाम पर माता, पिता या कोई गार्जियन अकाउंट खोल सकता है। अकाउंट खुलवाने के लिए पासपोर्ट साइज फोटो के साथ बच्चे की उम्र का सर्टिफिकेट देने होता है। इसके अलावा स्कूल सर्टिफिकेट भी जमा किया जा सकता है। आपको बता दें कि इस तरह के अकाउंट मेें हर साल एक लाख रुपए तक जमा किए जा सकते हैं।

रास्ते में खो जाए सामान तो मैरीन कार्गो पॉलिसी देगी बीमा कवर


नई दिल्ली। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी की मैरीन कार्गो पॉलिसी के तहत समुद्र, वायु मार्ग, सड़क और रेल मार्ग के जरिए ढोए जा रहे सामान के खोने या डैमेज होने की स्थिति में बीमा कवर दिया जाता है। इसके तहत कारोबारियों के लिए टेलर मेड पॉलिसीज (जरूरत के हिसाब से तैयार) उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि कारोबारी को किस तरह के कवरेज की जरूरत है। इसमें कारोबारी चाहें तो उन्हें केवल आग से जुड़े जोखिम को कवर करने वाली पॉलिसी दी जा सकती है या फिर वे चाहें तो सभी तरह के जोखिम को कवर करने वाली पॉलिसी भी उपलब्ध कराई जा सकती है। मैरीन कार्गो पॉलिसी के तहत सामानों के ट्रांसपोर्टेशन को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है- इनलैंड ट्रांसपोर्ट, इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट।
पॉलिसी के प्रकार
स्पेसिफिक वॉएज पॉलिसी
इसके तहत एक बार सामान ढोने के लिए खास पॉलिसी जारी की जाती है। जैसे ही यात्रा के बाद सामान अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच जाता है, यह बीमा कवर समाप्त हो जाता है।
ओपन पॉलिसी
यह एनुअल कार्गो इंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसमें एक संख्या तक  सामानों के डिस्पैच को कवर किया जाता है। इसके लिए पहले से ही एक राशि तय हो जाती है। उसके बाद उतने डिस्पैच कवर किए जाते हैं, जब तक वह राशि समाप्त न हो जाए। यह पॉलिसी लेने से पॉलिसी होल्डर को बार-बार बीमा कराने के झंझट से मुक्ति मिलती है। यह पॉलिसी देश में कहीं से भी कहीं को भेजे जाने वाले इनकमिंग और आउटगोइंग कन्साइनमेंट्स को कवर करती है।
ओपन कवर
ओपन कवर वह समझौता होता है जिसके तहत एक तय अवधि के लिए बीमा कंपनी उस बीमा कराने वाले व्यक्ति के सभी शिपमेंट का बीमा करती है। यह अवधि आम तौर पर 12 महीने होती है। लगातार एक्सपोर्ट/इम्पोर्ट करने वाले कारोबारियों के लिए यह काफी मुफीद है।
इसके अलावा मैरीन कार्गो पॉलिसी के तहत एनुअल टर्नओवर पॉलिसी और एनुअल पॉलिसी भी दी जाती है।
कैसे करें क्लेम
  • घाटा कम करने के लिए तुरंत जरूरी उपाय करें।
  • बीमा कंपनी की नजदीकी शाखा या क्लेम सेटल करने वाले एजेंट को इसकी सूचना दें।
  • शिप या पोर्ट पर सामान के डैमेज होने की स्थिति में ज्वाइंट शिप सर्वे या पोर्ट सर्वे की व्यवस्था करें।
  • तय अवधि के भीतर पैसों का दावा करें।
courtesy- bhaskar.com 

Friday, September 19, 2014

अगर नहीं मिल रहा है बीमा कंपनी से क्लेम, तो न हों परेशान, ये है उपाय

नई दिल्ली। नोएडा में रहने वाले सुरेश का मोबाइल फोन 19 अगस्त को उनके घर से चोरी हो गया। इसकी एफआईआर उन्होंने अपने संबंधित थाने में करा दी। चूंकि मोबाइल खरीदते समय मोबाइल विक्रेता ने पिक-मी से उसे इंश्योर कराने की सलाह दी थी, ऐसे में मोबाइल फोन के स्टोर से ही इसे खरीदते समय उन्होंने इंश्योर भी करा लिया था। सुरेश का कहना है कि गलत कारण बता कर कंपनी ने उनका क्लेम रिजेक्ट कर दिया है।
 
बीमा कंपनी के ग्रीवांस ऑफिसर से करें शिकायत
 
ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं। कई बार बीमा कंपनियां या इनके ब्रोकर/कॉरपोरेट एजेंट किसी क्लेम को पूरा करने में टालमटोल करते हैं। जहां पॉलिसी होल्डर की शिकायत के पीछे अपनी वजहें होती हैं, वहीं बीमा कंपनियां भी क्लेम खारिज करने के पीछे अपने कारण बताती हैं।
 
कारण चाहे जो भी हो, एक बीमाधारक के रूप में अगर आप किसी बीमा कंपनी से नाखुश हैं, तो आप उसके ग्रीवांस ऑफिसर से संपर्क कर सकते हैं। आप अपनी शिकायत लिखित में दें और इसके साथ जरूरी दस्तावेज भी दें। आप अपनी शिकायत दर्ज कराने की एकनॉलेजमेंट लिखित में लें।
 
 
 
अगर यहां न बने बात, तो इरडा से करें शिकायत
 
कायदन बीमा कंपनी को शिकायत दर्ज करने के 15 दिनों के भीतर इसका निबटारा कर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता या फिर आप कंपनी की ओर से किए गए निबटारे से असंतुष्ट हैं, तो बीमा नियामक इरडा के कंज्यूमर एफेयर्स डिपार्टमेंट के ग्रीवांस रिड्रेसल सेल से संपर्क करें। इसके लिए टॉल फ्री नंबर 155255 या फिर 1800 4254 732 पर संपर्क करें। आप इन्हें complaints@irda.gov.in पर ईमेल भी भेज सकते हैं।
 
इसके अलावा आप इंटिग्रेटेड ग्रीवांस मैनेजमेंट सिस्टम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए  www.igms.irda.gov.in पर रजिस्टर करें और अपनी शिकायत पर हो रही कार्रवाई को मॉनिटर करें।
 
आप इस लिंक पर क्लिक कर कम्प्लेन्ट रजिस्ट्रेशन फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं-
 
इस फॉर्म को भर कर आप इरडा को अपनी शिकायत साधारण डाक या कुरियर से इस पते पर भेज सकते हैं- 
कंज्यूमर एफेयर्स डिपार्टमेंट
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी
3-5-817/818, यूनाइटेड इंडिया टावर्स, नाइन्थ फ्लोर
हैदरगुडा, बशीरबाग
हैदराबाद- 500029
आप इस नंबर पर फैक्स भी कर सकते हैं- 040-66789768 

courtesy- bhaskar.com